Trump tariff और जीरो इंपोर्ट ड्यूटी से एमपी का कपास उद्योग बड़ा संकट झेल रहा है। इससे किसानों, व्यापारियों व फैक्ट्रियों की स्थिति कमजोर हो सकती है। सरकार और उद्योग दोनों समाधान खोजने की कोशिश में हैं।
अमेरिका ने भारत के कपास व टेक्सटाइल्स उत्पादों पर 50% टैरिफ लगाया है। जिससे मध्य प्रदेश का कपास और टेक्सटाइल्स उद्योग सीधा प्रभावित हुआ है। अभी प्रदेश से करीब 3546 करोड़ डॉलर का टेक्सटाइल निर्यात होता है, जिसमें अमेरिका की हिस्सेदारी 26% है। टैरिफ के बाद यह निर्यात घटकर केवल 1.50 हजार करोड़ तक पहुंच सकता है।
सरकार ने कपास (HS 5201) के आयात पर ड्यूटी को 31 दिसंबर 2025 तक शून्य कर दिया है। पहले ये सुविधा 30 सितंबर तक थी। इससे देश में विदेशी कपास सस्ती हो जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे घरेलू कपास किसानों को नुकसान होगा और उनके लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।Trump tariff
मप्र एसोसिएशन ऑफ कॉटन प्रोसेसर्स एंड ट्रेडर्स के अध्यक्ष कैलाश अग्रवाल ने बताया कि, अब व्यापारी और किसान नए बाजार तलाश रहे हैं। ब्रिटेन के साथ ड्यूटी-फ्री एग्रीमेंट हो चुका है। ऑस्ट्रेलिया, जापान जैसे देशों में भी संभावना तलाशी जा रही है।
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कपास उत्पादक देश है। मध्य प्रदेश में इस साल करीब 19 लाख गांठ कपास उत्पादन का अनुमान है। प्रदेश में करीब 50 टेक्सटाइल मिल्स हैं। खरगोन, खंडवा, बड़वानी, धार, बुरहानपुर, रतलाम – ये जिले कपास की खेती का केंद्र हैं। इंदौर, देवास, उज्जैन बड़े कपड़ा उद्योग हब हैं।Trump tariff
टेक्सटाइल्स मिल्स एसोसिएशन के सचिव एमसी रावत के मुताबिक, टैरिफ बढ़ने से एक्सपोर्ट घटेगा। नए देशों में बाजार तलाशने और फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स करने में कुछ समय लगेगा। उद्योग अब सरकार की छूट योजनाओं और नये निर्यात बाजारों का इंतजार कर रहे हैं।







