मध्य प्रदेश में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया शुरू होते ही विवाद बढ़ा। हजारों शिक्षकों को BLO की ड्यूटी देने पर विपक्ष और संघों ने आपत्ति जताई।
मध्य प्रदेश में वोटर लिस्ट रिवीजन पर शिक्षकों की ड्यूटी से विवाद
मध्य प्रदेश में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की शुरुआत होते ही बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। 4 नवंबर से प्रदेशभर में करीब 65 हजार BLO घर-घर जाकर मतदाताओं की जानकारी जुटा रहे हैं।
इनमें से 15 हजार से ज्यादा BLO शिक्षक हैं। इसी बात को लेकर बहस शुरू हो गई है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों की कमी झेल रहे स्कूलों के बीच हजारों शिक्षकों को SIR में लगाना शिक्षा व्यवस्था को ठप करने जैसा है।
सिंघार ने बताया कि प्रदेश में 6 हजार से अधिक स्कूल ऐसे हैं जो एक या दो शिक्षकों के भरोसे चल रहे हैं। अगर इनमें से भी कई शिक्षक BLO की ड्यूटी में चले गए, तो स्कूलों में ताले लगने जैसी स्थिति बन जाएगी।
उन्होंने कहा कि कुछ जगह तो प्राचार्य और प्रभारी प्राचार्य तक को BLO बना दिया गया है। इससे स्कूलों का संचालन मुश्किल हो जाएगा।
एक और गंभीर बात यह है कि 12वीं कक्षा में गणित और विज्ञान पढ़ाने वाले शिक्षकों को भी BLO की ड्यूटी दी गई है। इसे नियमों के खिलाफ माना जा रहा है।
वहीं, SIR का अंतिम प्रकाशन 7 फरवरी 2026 को तय है — उसी दिन एमपी बोर्ड की परीक्षाएं भी शुरू होंगी। इसे देखते हुए अभिभावक और शिक्षक दोनों चिंतित हैं।
नीमच जिले में जब BLO बनाए गए पांच शिक्षक अपने स्कूल लौटे, तो उन्हें निर्वाचन कार्य में लापरवाही के आरोप में निलंबित कर दिया गया। इस कार्रवाई के बाद शिक्षकों में नाराजगी फैल गई है।
शिक्षक संगठनों ने कहा कि इस तरह के फैसले से बच्चों की पढ़ाई पर असर पड़ेगा। उन्होंने मांग की है कि सरकार शिक्षकों को वोटर लिस्ट रिवीजन की ड्यूटी से मुक्त करे।
उमंग सिंघार ने सवाल उठाया कि जब प्रदेश में पहले से ही शिक्षक कम हैं, तो स्कूलों को कमजोर करने वाला यह फैसला आखिर किसके हित में है?







