भोपाल में राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ पर भाजपा कार्यालय में कार्यक्रम हुआ। नेताओं ने देशभक्ति और विकसित भारत- विकसित मध्य प्रदेश के संकल्प को दोहराया।
वंदे मातरम के 150 वर्ष : भोपाल में भाजपा ने मनाई ऐतिहासिक वर्षगांठ
भोपाल (मध्य प्रदेश): भारत के राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ के मौके पर भोपाल स्थित प्रदेश भाजपा कार्यालय में एक भव्य समारोह हुआ। पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने इस अवसर पर बड़ी संख्या में भाग लिया।
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन के साथ हुई। नेताओं ने सभी को इस ऐतिहासिक दिन की बधाई दी और राष्ट्र के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की।
कार्यक्रम के दौरान स्वदेशी की भावना को बढ़ावा देने और “विकसित भारत – विकसित मध्य प्रदेश” के निर्माण का संकल्प लिया गया। वक्ताओं ने कहा कि यह गीत हमें देश की एकता और शक्ति का संदेश देता है।
राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने पर नवंबर माह भर में देशभर में ऐसे 150 कार्यक्रम आयोजित किए जाएँगे। यह गीत मूल रूप से बंगाली भाषा में लिखा गया था। बाद में इसका संस्कृत और हिंदी के मिश्रण में अनुवाद किया गया।
यह रचना पहली बार 1882 में प्रकाशित उपन्यास आनंदमठ में दिखाई दी थी। वंदे मातरम का अर्थ है “मैं तुम्हें नमन करता हूँ, माँ।” यह भारत को मातृभूमि के रूप में पूजता है।
स्वतंत्रता संग्राम के दौरान यह गीत एकता और प्रेरणा का प्रतीक बना। इसे पहली बार रवींद्रनाथ टैगोर ने 1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में गाया था।
गीत के पहले दो छंदों को बाद में राष्ट्रीय गीत के रूप में अपनाया गया। इसका संगीत पंडित जदुनाथ भट्टाचार्य ने तैयार किया था।
आज भी वंदे मातरम पूरे देश में गर्व और देशभक्ति के साथ गाया जाता है। यह हमें हमारी मातृभूमि और उसके गौरव की याद दिलाता है।







