MP News : मध्यप्रदेश भाजपा ने परिवारवाद पर सख्त रुख अपनाया। जिलों की कार्यकारिणी चयन में तीन नेताओं के परिजनों से इस्तीफे लिए गए। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने संगठन में जमीनी कार्यकर्ताओं को मौका देने के निर्देश दिए।
भोपाल। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसी साल साफ कहा था कि राजनीति में जमींदारी प्रथा खत्म होनी चाहिए और परिवारवाद की राजनीति में कोई जगह नहीं होनी चाहिए। इस संदेश के बाद मध्यप्रदेश भाजपा ने संगठन स्तर पर सख्ती दिखानी शुरू की है।
प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने परिवारवाद पर लगाम कसने का अभियान शुरू किया है। हाल ही में जिलों की कार्यकारिणी चयन के समय तीन जिलों में कुछ नेताओं के परिजन पदों पर नियुक्त किए गए थे। इस पर संगठन ने तुरंत कार्रवाई की और तीनों से इस्तीफे ले लिए।
किन पर हुई कार्रवाई
मंडला जिले में मंत्री संपतिया उड़के की बेटी श्रद्धा उइके को कार्यकारिणी में मंत्री बनाया गया था। विवाद सामने आते ही उनसे इस्तीफा लिया गया।
सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते की बहन प्रिया धुर्वे को जिला उपाध्यक्ष बनाया गया था। उनसे भी पद रिक्त करवाया गया।
मऊगंज जिले की कार्यकारिणी में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम के पुत्र राहुल गौतम उपाध्यक्ष बनाए गए थे। मामला उठते ही उन्होंने स्वयं इस्तीफा दे दिया।
संगठन का संदेश
प्रदेश भाजपा संगठन ने यह संकेत दिए हैं कि परिवारवाद को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जिलाध्यक्षों को स्पष्ट गाइडलाइन दी गई है कि वे केवल निष्ठावान और जमीनी कार्यकर्ताओं को पद दें।
सूत्रों के अनुसार, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा है कि पार्टी को मजबूत बनाने वाले कार्यकर्ताओं को ही प्राथमिकता दी जाएगी। बड़े नेताओं के परिजनों को पद देना आम कार्यकर्ताओं के साथ अन्याय होगा।
आगे की रणनीति
प्रदेश संगठन ने साफ संकेत दिए हैं कि जैसे-जैसे बाकी जिलों की कार्यकारिणी घोषित होगी, इस नियम पर सख्ती से अमल होगा। राष्ट्रीय नेतृत्व ने भी परिवारवाद पर रोक लगाने के आदेश दिए हैं। यह कदम भाजपा को जमीनी स्तर पर मजबूत करने और समर्पित कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ाने की दिशा में बड़ा फैसला माना जा रहा है।







