MP News : परासिया के नौ मासूमों की मौत पर सवाल, तमिलनाडु ने 24 घंटे में जांच की तो मध्य प्रदेश क्यों इंतज़ार में?

By: Degital Team

On: Saturday, October 4, 2025 1:05 PM

मध्यप्रदेश में दो और कफ सिरप पर लगेगी रोक, जांच में जहरीला केमिकल मिलने का खुलासा
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MP News : छिंदवाड़ा के परासिया में नौ बच्चों की मौत के बाद सरकार अब भी रिपोर्टों का इंतज़ार कर रही है, जबकि तमिलनाडु ने 24 घंटे में जहरीले कोल्ड्रिफ सिरप की जांच पूरी कर प्रतिबंध लगा दिया। सवाल यह है कि मध्य प्रदेश में कार्रवाई में देर क्यों?

परासिया के नौ मासूमों की खामोश मौत, सवालों में मध्य प्रदेश की सुस्ती

छिंदवाड़ा के परासिया में शिवम, विधि, अदनान, उसैद, ऋषिका, हेतांश, विकास, चंचलेश और संध्या अब इस दुनिया में नहीं हैं। नौ बच्चों की मासूम हंसी हमेशा के लिए खामोश हो गई। लेकिन सरकार अब भी रिपोर्टों का इंतज़ार कर रही है।

उधर तमिलनाडु में छुट्टी के दिन भी जांच कर ली गई। सिर्फ 24 घंटे में रिपोर्ट आ गई और सच सामने था। कोल्ड्रिफ सिरप के बैच SR-13 में 48.6% डाईएथिलीन ग्लाइकॉल मिला। यानी वही ज़हर जिससे परासिया के इन बच्चों की जान गई हो सकती है।

परिजनों के आरोप और लक्षण

परिजनों ने आरोप लगाया कि बच्चों को दी गई खांसी की दवा कोल्ड्रिफ और नेक्स्ट्रोस डीएस ही मौत की वजह बनी। लगभग हर बच्चे को पहले बुखार, फिर उल्टियां और दस्त हुए। इसके बाद अचानक पेशाब बंद हो गया। डॉक्टरों के अनुसार, यह डायथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) ज़हरखुरानी के लक्षण हैं।

मध्य प्रदेश की किडनी बायोप्सी रिपोर्ट भी यही इशारा कर रही है। लेकिन राज्य सरकार अब भी “अंतिम रिपोर्ट” का इंतज़ार कर रही है।

MP News : परासिया के नौ मासूमों की मौत पर सवाल, तमिलनाडु ने 24 घंटे में जांच की तो मध्य प्रदेश क्यों इंतज़ार में?

तमिलनाडु ने दिखाया फुर्ती

1 अक्टूबर को तमिलनाडु के ड्रग कंट्रोल विभाग को मध्य प्रदेश से बैच SR-13 के बारे में सूचना मिली। 1 और 2 अक्टूबर को छुट्टियां थीं, फिर भी टीम फैक्ट्री पहुंच गई। कांचीपुरम जिले की श्रीसन फार्मास्युटिकल्स में जांच हुई।

टीम ने 39 गंभीर खामियां और 325 गड़बड़ियां पाईं। सैंपल तुरंत चेन्नई लैब भेजे गए। वैज्ञानिकों ने 24 घंटे में रिपोर्ट तैयार की। नतीजा साफ था — 48.6% डाईएथिलीन ग्लाइकॉल से दूषित सिरप।

तमिलनाडु सरकार ने देर न करते हुए पूरे राज्य में अलर्ट जारी किया। सिरप का वितरण तुरंत रोका गया। तीन अक्टूबर को उत्पादन रोकने और लाइसेंस रद्द करने का आदेश दिया गया।

धीमी जांच पर उठे सवाल

मध्य प्रदेश में स्वास्थ्य मंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि सैंपलों में अभी तक कोई हानिकारक तत्व नहीं मिला। बाकी नमूनों की रिपोर्ट आने का इंतज़ार किया जा रहा है। वहीं परासिया के एसडीएम शुभम यादव का कहना है कि बायोप्सी में किडनी इंफेक्शन मिला है, जो “कॉमन बीमारी” की वजह से हो सकता है।

लेकिन राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अधिकारी डॉ. प्रभाकर तिवारी ने कहा कि बायोप्सी से साफ है कि बच्चों की किडनी टॉक्सिक तत्वों से फेल हुई। उन्होंने सीधे तौर पर कफ सिरप में पाए गए इंडस्ट्रियल सॉल्वेंट को इसका कारण बताया।

सत्ता पक्ष का इंकार और सबूत

एक तरफ तमिलनाडु 24 घंटे में जांच पूरी कर लेता है, वहीं मध्य प्रदेश में 9 बच्चों की मौत के बाद भी कार्रवाई ठहरी हुई है। राज्य के मंत्री सबूतों से इनकार कर रहे हैं, जबकि रिपोर्टें कुछ और कह रही हैं। छिंदवाड़ा की माताएं अब बस एक सवाल पूछ रही हैं — जब सबूत ज़हर की ओर इशारा कर रहे हैं, तो सरकार और कितनी रिपोर्टों और मौतों का इंतज़ार करेगी?

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