MP News : मध्यप्रदेश के गुना जिले में देवा पारधी की हिरासत में मौत के मामले में दो पुलिस अधिकारी फरार हैं। दोनों पर 2-2 लाख रुपये का इनाम घोषित हुआ है। CBI मामले की जांच कर रही है और तीन आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।
गुना हिरासत मौत कांड : दो अफसर फरार, CBI जांच के बीच तेज हुई तलाश
मध्यप्रदेश के गुना जिले में देवा पारधी की हिरासत में मौत का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। इस घटनाक्रम ने न केवल न्याय व्यवस्था बल्कि पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ताजा जानकारी के मुताबिक, म्याना थाने में पदस्थ रहे थाना प्रभारी (टीआई) संजीत सिंह और सहायक उपनिरीक्षक (एएसआई) उत्तम सिंह कुशवाहा फरार हो गए हैं। दोनों पर पुलिस मुख्यालय की तरफ से दो-दो लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया है।
गैर-जमानती वारंट जारी
फरार दोनों अधिकारियों के खिलाफ अदालत से गैर-जमानती वारंट जारी होकर पुलिस प्रशासन पर दबाव और बढ़ गया है। लगातार की जा रही तफ्तीश के बावजूद अब तक उनकी लोकेशन का सुराग नहीं मिल पाया है। यही वजह है कि इनाम रखकर उनकी तलाश को और तेज किया गया है।
तीन गिरफ्तार
इस मामले में अब तक तीन पुलिसकर्मी गिरफ्तार किए जा चुके हैं। इनमें उपनिरीक्षक देवराज सिंह परिहार, नगर निरीक्षक जुबैर खान और एक अन्य आरोपी शामिल हैं। तीनों से पूछताछ की जा रही है और उन्हें कोर्ट में पेश कर जेल भेजा जा चुका है।

CBI की निष्पक्ष जांच
देवा पारधी की हिरासत में मौत के बाद जनता और परिजनों में आक्रोश बढ़ा था, जिसके दबाव में जांच का जिम्मा केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपा गया। सीबीआई इस पूरे मामले की बारीकी से जांच कर रही है। एजेंसी का कहना है कि सबूतों और गवाहों के आधार पर निष्पक्ष तरीके से दोषियों को चिह्नित किया जाएगा ताकि किसी भी निर्दोष पर कार्रवाई न हो और असल आरोपी बच न पाए।
पुलिस की साख पर सवाल
इस घटना ने पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली और हिरासत में होने वाली पूछताछ के तरीकों को कटघरे में खड़ा कर दिया है। मानवाधिकार संगठनों और स्थानीय लोगों ने मांग की है कि दोषी अधिकारियों को कठोर सजा दी जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त दिशा-निर्देश बनाए जाएं।
प्रशासन की सख्त कार्रवाई
राज्य सरकार और पुलिस मुख्यालय ने स्पष्ट कर दिया है कि इस मामले में किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा। फरार अधिकारियों की गिरफ्तारियों के लिए विशेष टीमें गठित की गई हैं। पुलिस महानिरीक्षक स्तर के अधिकारी उनके संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश डाल रहे हैं।
गुना की यह घटना हिरासत में मानवाधिकार हनन का बड़ा उदाहरण बन गई है। अब निगाहें सीबीआई की जांच और फरार पुलिसकर्मियों की जल्दी गिरफ्तारी पर टिकी हैं।







