भारत और अमेरिका के बीच हालिया व्यापारिक तनाव के बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंप ने रिश्तों में नरमी का संकेत दिया। मोदी ने ट्रंप की सराहना की तो ट्रंप ने मोदी को “मित्र” और “महान प्रधानमंत्री” बताया।
भारत और अमेरिका के बीच रिश्ते चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रहे हैं। व्यापार और ऊर्जा नीति पर मतभेद बने हुए हैं। फिर भी मोदी और ट्रंप के व्यक्तिगत रिश्ते ने एक नई नरमी का संकेत दिया है। इस सप्ताहांत भारत और अमेरिका के बीच रिश्तों में नरमी के संकेत मिले। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टिप्पणियों को सार्वजनिक तौर पर स्वीकार किया। ट्रंप ने मोदी को “महान प्रधानमंत्री” और “मित्र” कहा था।
रूस से तेल खरीद को लेकर अमेरिका ने भारत पर भारी टैरिफ लगाए हैं। इसके बाद यह पहला मौका है जब मोदी ने ट्रंप के साथ अपने निजी रिश्तों पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने X पर लिखा, “राष्ट्रपति ट्रंप की भावनाओं और हमारे संबंधों के आकलन की मैं गहरी सराहना करता हूँ। भारत और अमेरिका के बीच रिश्ते वैश्विक महत्व के हैं।”
ट्रंप की आलोचना, फिर तारीफ़
ट्रंप ने हाल ही में भारत को लेकर नाराजगी जताई थी। उन्होंने कहा था कि भारत रूस से बहुत अधिक तेल खरीद रहा है। इसी कारण अमेरिका ने भारतीय आयात पर 50 प्रतिशत तक टैरिफ लगा दिए हैं।
5 सितंबर को ओवल ऑफिस में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ट्रंप ने कहा, “मुझे भारत के रूस से तेल खरीदने पर निराशा हुई है। हमने उन्हें यह बता दिया है और बड़ा शुल्क लगाया है।” फिर भी ट्रंप ने मोदी की तारीफ़ करते हुए कहा, “मेरे और मोदी के बीच अच्छे रिश्ते हैं। वह महान प्रधानमंत्री और मेरे दोस्त हैं।”
रिश्तों में उतार-चढ़ाव
ट्रंप लगातार अलग-अलग सुर में बयान दे रहे हैं। 1 सितंबर को उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में भारत पर तीखा हमला किया था। उन्होंने अमेरिका-भारत संबंधों को “एकतरफ़ा संकट” बताया।
कुछ दिन बाद उन्होंने लिखा कि अमेरिका भारत और रूस को चीन के हाथों खो रहा है। यह बात तब कही गई, जब एससीओ शिखर सम्मेलन में मोदी, पुतिन और शी जिनपिंग एक साथ दिखे थे।
भारत सरकार ने इन आलोचनाओं का सीधे जवाब देने से इंकार कर दिया। लेकिन विदेश मंत्रालय ने बार-बार कहा है कि रूसी तेल आयात भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए ज़रूरी है।







