सीधी जिले में भ्रष्टाचार और लापरवाही का बड़ा मामला सामने आया है। आरईएस विभाग और पंचायती राज की मिलीभगत से बनी सड़क और पुल पहली ही बारिश में ढह गए। ग्रामीणों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है।
सीधी जिले में भ्रष्टाचार और लापरवाही का ताजा मामला उजागर हुआ है। यहां आरईएस विभाग और पंचायती राज की मिलीभगत से करोड़ों रुपये बर्बाद हो गए। बरसात शुरू होते ही सड़क और पुल तिनके की तरह टूट गए। इससे गांव के लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार, मोहनिया ग्राम पंचायत को जोड़ने वाली सड़क के लिए पूर्व विधायक ने लगभग 1 करोड़ 45 लाख रुपये की मंजूरी दिलाई थी। इस सड़क की लंबाई करीब 8 किलोमीटर थी। लेकिन निर्माण में बड़े स्तर पर धांधली हुई। सड़क पर सिर्फ किरची और डस्ट डालकर खानापूर्ति कर दी गई। नतीजा यह हुआ कि पहली ही बारिश में पूरी सड़क उखड़ गई।
पुलों का भी बुरा हाल
ग्रामीणों ने बताया कि जिन पुलों का निर्माण होना था, उनमें से कई शुरू ही नहीं हुए। जो पुल बनाए गए वे पहली ही बरसात में बह गए। हालात यह हैं कि बरसात के दिनों में ग्रामीणों को रोजाना मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों की बढ़ी परेशानी
स्थानीय लोग अब इसकी भारी कीमत चुका रहे हैं। छात्रों को स्कूल जाने के लिए लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा है। बीमार मरीजों को अस्पताल पहुंचने में दिक्कत हो रही है। गांव के लोग कहते हैं कि विभाग और ठेकेदारों की मिलीभगत से सरकारी धन की खुली लूट हुई है।
शिकायतों पर भी कार्रवाई नहीं
ग्रामीणों ने कई बार शिकायत दर्ज कराई। सीएम हेल्पलाइन से लेकर जिला प्रशासन तक गुहार लगाई गई। लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। मीडिया में आई तस्वीरें और वीडियो साफ बताते हैं कि निर्माण पूरी तरह घटिया था।
अधिकारियों के खिलाफ होगी कार्रवाई
इस मामले पर जिला पंचायत के सीईओ अंशुमन राज ने बयान दिया है। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों की शिकायतों की जांच के लिए टीम बनाई गई है। अगर कोई अधिकारी और ठेकेदार दोषी पाया गया तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। यह मामला सीधी जिले में विकास कार्यों की असलियत दिखाता है। सरकार जहां करोड़ों खर्च करने का दावा करती है, वहीं भ्रष्टाचार और लापरवाही की वजह से जनता की गाढ़ी कमाई पानी में बह रही है।







