IGST विवाद : भारतीय कागज़ निर्माता संघ (आईपीएमए) ने नई जीएसटी दरों पर चिंता जताई। संघ ने कहा कि इससे पेपर आयातकों को लाभ मिलेगा और देशी उद्योग पर दबाव बढ़ेगा।
पेपर आयात को बढ़ावा, घरेलू उद्योग पर खतरा: IPMA
नई दिल्ली। भारतीय कागज़ निर्माता संघ (IPMA) ने कहा है कि सोमवार से लागू हुई नई जीएसटी दरों से कागज़ और पेपरबोर्ड आयातकों को अतिरिक्त लाभ मिलेगा। इसका सीधा असर देश के घरेलू पेपर उद्योग पर पड़ेगा।
IMPA ने मांग की है कि कागज़ के आयात पर 18 प्रतिशत आईजीएसटी लगाया जाए। संघ का कहना है कि घरेलू उत्पाद पहले से ही जीरो या कम आयात शुल्क पर आने वाले सस्ते कागज़ से दबाव झेल रहे हैं। अब स्थिति और कठिन हो जाएगी।
IMPA अध्यक्ष पवन अग्रवाल ने बताया कि अभ्यास पुस्तिकाओं और नोटबुक में इस्तेमाल होने वाले अनकोटेड पेपर और पेपरबोर्ड पर जीएसटी शून्य कर दिया गया है। इससे आयातकों पर कोई आईजीएसटी नहीं लगेगा। वहीं घरेलू निर्माता निर्माण लागत पर इनपुट टैक्स जोड़ने को मजबूर होंगे। इससे आयात बढ़ेगा और देशी उद्योग को नुकसान होगा।
उन्होंने कहा कि लुगदी पर जीएसटी 12 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दी गई है। लेकिन लकड़ी, जो लुगदी बनाने का मुख्य कच्चा माल है, उस पर अभी भी 18 प्रतिशत जीएसटी है। इससे विदेशी लुगदी का आयात तेज़ी से बढ़ेगा। यह भारतीय किसानों की आय पर असर डालेगा और विदेशी मुद्रा का भारी बहिर्वाह होगा।

IMPA ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल को ज्ञापन देकर इस फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की है। संघ का कहना है कि मौजूदा ढांचा निवेश और भविष्य की क्षमता वृद्धि को खतरे में डाल देगा।
संघ ने यह भी चिंता जताई कि अलग-अलग ग्रेड के पेपर और पेपरबोर्ड पर जीएसटी को 12 से बढ़ाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है। इससे उद्योग पर लागत का दबाव बढ़ेगा और अंतिम उपभोक्ताओं को भी अधिक कीमत चुकानी पड़ेगी।
नोटबुक और कॉपी की कीमत बढ़ेगी
IMPA ने चेतावनी दी है कि नोटबुक और कॉपी महंगी होंगी। जीएसटी शून्य होने से निर्माता को अब इनपुट टैक्स क्रेडिट लाभ नहीं मिलेगा। उन्हें कच्चे माल, सेवाओं और मशीनों पर चुकाया गया जीएसटी सीधे लागत में जोड़ना होगा।
संघ का कहना है कि आईटीसी श्रृंखला टूटने से निर्माण लागत और बढ़ जाएगी। इसका सीधा असर उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा।







