राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत शिक्षा मंत्रालय ने NCERT को देशभर के शिक्षा बोर्डों द्वारा जारी 10वीं और 12वीं कक्षा के प्रमाणपत्रों को समकक्षता प्रदान करने की जिम्मेदारी दी है। इससे छात्रों के लिए स्थानांतरण, उच्च शिक्षा और सरकारी नौकरियों में आवेदन करना आसान होगा।
राष्ट्रीय शिक्षा सुधार : अब कक्षा 10वीं और 12वीं के प्रमाणपत्रों को NCERT देगी समकक्षता
नई दिल्ली। भारत की शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए शिक्षा मंत्रालय ने राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (NCERT) को एक अहम जिम्मेदारी सौंपी है। अब पूरे देश में कक्षा 10 और 12 के विभिन्न बोर्डों से जारी प्रमाणपत्रों को समकक्षता (Equivalence) प्रदान करने का कार्य एनसीईआरटी करेगी।
यह निर्णय राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 की भावना के अनुरूप लिया गया है, जिसके तहत देशभर के शिक्षा तंत्र में एकरूपता और पारदर्शिता लाना सरकार का लक्ष्य है। इस कदम से छात्रों को सबसे ज्यादा लाभ मिलेगा, क्योंकि अब बोर्ड बदलने पर या फिर कॉलेजों और सरकारी नौकरियों के लिए आवेदन करते समय अलग-अलग मान्यता की बाधा नहीं आएगी।
शिक्षा मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, यह कार्य एनसीईआरटी अपने राष्ट्रीय मूल्यांकन केंद्र परख के माध्यम से करेगी। परख का मुख्य उद्देश्य एक निष्पक्ष, कठोर और पारदर्शी प्रक्रिया स्थापित करना है, जिससे कि शिक्षा के मानक राष्ट्रीय स्तर पर एक समान बने रहें।

इस व्यवस्था के तहत केवल केंद्रीय या राज्य विधान से संचालित बोर्ड ही नहीं, बल्कि वैधानिक प्राधिकरणों और अन्य मान्यता प्राप्त निकायों द्वारा जारी प्रमाणपत्र भी शामिल होंगे। एक बार जब एनसीईआरटी किसी प्रमाणपत्र को समकक्षता प्रदान कर देगी, तो उसे पूरे देश में स्वतः मान्यता मिल जाएगी और सभी शिक्षा बोर्डों एवं संस्थानों में यह समान रूप से स्वीकार्य होगा।
यह सुधार 6 सितंबर, 2025 को ई-गजट में अधिसूचना जारी होने के बाद लागू होगा। इससे पहले यह जिम्मेदारी भारतीय विश्वविद्यालय संघ (एआईयू) के पास थी। अब एनसीईआरटी को यह जिम्मेदारी मिलने से सरकार को उम्मीद है कि छात्रों की स्कूल से कॉलेज और फिर विश्वविद्यालयों तक की शैक्षणिक यात्रा और भी सहज होगी।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह निर्णय न केवल शिक्षा प्रणाली को और व्यवस्थित करेगा, बल्कि छात्रों की आवाजाही और अवसरों तक उनकी पहुंच को भी व्यापक करेगा। यह बदलाव राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा के क्षेत्र में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।







